जयद्रथ-वध – मैथिलीशरण गुप्त

Complete Book - Jaidratha Vadh (source - archive.org) उत्तरा विषाद प्रिय-मृत्यु का अप्रिय महा-संवाद पाकर विष-भरा, चित्रस्थ-सी निर्जीव मानो रह गई हट उत्तरा! संज्ञा-रहित तत्काल ही फिर वह धरा पर गिर पड़ी, उस काल मूर्च्छा भी अहो! हितकर हुई उसको बड़ी || कुछ देर तक दुर्दैव ने रहने न दी यह भी दशा, झट दासियों से की …

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Happy International Women’s Day

अहल्या द्रौपदी तारा कुंती मन्दोदरी तथा । पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशनम् ॥ Remembering ever the virgins five - Ahalya, Draupadi, Kunti, Tara and Mandodari Destroys the greatest sins. The Great Ladies from Epic. Shree Hari...